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Lyrics

हे प्रभु (He Prabhu)

Satyavani Bhajan (Part-1)
हे प्रभु हे प्रभु तू है जल मैं जल लहर समाना। तू है प्रभु सागर मैं हूँ तेरी सरीता नाना ॥ सर्वत्र है प्रभु तू नहिं कोउ जग आना। सबका पालन तू करता प्रकृति विधाना ॥ बिनु तेरे कुछ नहीं तू ही कारण तू ही निधाना ॥ तू है एक रस नहिं हिन्दू नहिं मुसलमाना। नर मादा सब के घट रहता तू एक समाना ॥ तेरी लीला तू ही जाने और कोउ न जाना। नेति नेति सब तोहि निगम पुरान बखाना। सब के उर में तू रहता कोउ कोउ यह जाना। शरण है तेरी सुखदायी यह मैंने अब माना ॥ ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
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