ओ सखा चलो गुरु शरण में चलें
ओ सखा चलो गुरु शरण में चले
मेरो सतगुरु आनन्द को खजानो
चलो सखा आनन्द लूटने चलें ।
मेरो सतगुरु ज्ञान को दाता
चलो सखा ज्ञान माँगने चले ।
मेरो सतगुरु सद्गुणों का भण्डार ॥
चलो सखा सद्गुण पाने चले ।
मेरो सतगुरु करुणा को सागर
चलो सखा करुणा में नहाने चलें ।
मेरो सतगुरु मुक्ति को दाता
चलो सखा मुक्ति पाने चलें ।
मेरो सतगुरु अल्लाह अलख निरंजन
चलो सखा अलख जगाने चलें ॥
मेरो सतगुरु आनन्दकंद पार ब्रह्म
चलो सखा सतगुरु से मिलने चले ।
‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।
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