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Lyrics

प्रभु अनन्त (Prabhu Anant)

Satyavani Bhajan (Part-1)
प्रभु अनन्त अनन्त नाम तेरे अलौकिक तेरे काम। बन कंदरा ढूंढे जग घट घट तेरा धाम ॥ बिनु कर्म तू मिलता नहीं किसी को। जग सब कर्ता तू फिर भी रहता निष्काम ॥ अनन्त नाम ...................................... । क्रिया को कर्म कहत है जग सारा। मरम कोई कर्म न जाने कैसे मिले तू राम ॥ अनन्त नाम ...................................... । भजन ही कर्म बाकी है क्रिया सारी जो करे भजन पाए वो ही परम धाम ॥ अनन्त नाम ...................................... । नहिं ग्यान विज्ञान तेरे वहाँ प्रभु नहिं निसि दिवस नहि सुबह शाम ॥ अनन्त नाम ...................................... । सुख में याद तुझे जग नहीं करता। दु:ख में दोष लगाता तूझ पर विधाता बाम ॥ अनन्त नाम ...................................... । आनन्द घन एक रस प्रभु तू सदा। बिरथा तुझे जग करता बदनाम ॥ अनन्त नाम ...................................... । कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु शरण हरि की आओ लगे नहि दाम ॥ अनन्त नाम ...................................... । ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra,
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