ध्यान विधि
अवधू ऐसा ध्यान लगाना
फिर वापिस जग नहीं आना ॥
सब ग्रन्थन की समीधा कर
सत का तू धूना रमाना ॥
अवधू ऐसा ...................
लग्न की अग्नि जलाकर
त्रिगुण का त्रिशूल जमाना ॥
अवधू ऐसा ...................
भावों की माला कर में लेना
आवत जावत श्वास सम्भलाना ॥
अवधू ऐसा ...................
अन्तर दृष्टि खुद पर डालो
निज हियँ हरि खोज लगाना ॥
अवधू ऐसा ...................
आयेंगे बहु भोग जग में
पर वहाँ नहीं तू लुभाना ॥
अवधू ऐसा ...................
अल्लाह ईश्वर एक मानना
नाम भ्रम मत भरमाना ॥
अवधू ऐसा ...................
सुरता को सुरता में लगाकर
नाम अंकुश सुरता में फँसाना ॥
अवधू ऐसा ...................
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु
करि ध्यान परम पद पाना ॥
अवधू ऐसा ...................
‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।
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