ध्यान
अवधू बिनु ध्यान ग्यान नहि भाई।
बिनु ग्यान जन्म विरथा जाई ॥
अवधू बिनु ध्यान ...............................................
जप तप नियम संयम
ध्यान आधार सब भाई ॥
अवधू बिनु ध्यान ...............................................
मन हस्ति काम बिकल भया
बिनु ग्यान अंकुश नहिं बस आई ॥
अवधू बिनु ध्यान ...............................................
आवत जावत श्वास निहारे
सोई मारग ध्यान सुहाई ॥
अवधू बिनु ध्यान ...............................................
आज्ञाचक्र मन बनिक बैठा
तहँ ग्यान बाजार लगाई ॥
अवधू बिनु ध्यान ...............................................
कोई बिरला करे तहँ बजारा
मुद्रा अहंकार चुकाई ॥
अवधू बिनु ध्यान ...............................................
त्रिगुण की नाना हाट लगी
मन केवल एक व्यवसाई ॥
अवधू बिनु ध्यान ...............................................
बन्धन मुक्ति तहँ मिलती
रुचि होय सो खरीदो भाई ॥
अवधू बिनु ध्यान ...............................................
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु
सब समझो ध्यान लगाई ॥
अवधू बिनु ध्यान ...............................................
‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।
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