Loading...

Lyrics

हे परम पिता (He Param Pita)

Satyavani Bhajan (Part-1)
हे परम पिता हे परम पिता मैंने जब तुझे पुकारा ऐसे लगा तूने अपना हाथ पसारा। जब मैं श्रद्धा में डूब कर तुझे पुकारता हूँ लीन होकर। तब तब तुझे मेरे निकट पाया ऐसा लगा मुझे जैसे तू मेरे लिए आया ॥ मैं जब इच्छाओं में भ्रमित होता हूँ तब मेरा विश्वास हिलता पाता हूँ ॥ तेरे नाना नाम पंथ सुन सुन कर मेरा मन विचलत्ता है रह रह कर ॥ मैं भी कल्पना के आकाश में पतंग की तरह उड़ता हूँ हवा में ॥ पर वहाँ भी मैं देखता हूँ तुझको पतंग की डोर बन कर उड़ाता है मुझको ॥ जब जब तेरा आभास होता है तब तब तुझसे मिलने का मन होता है ॥ हे परम पिता इतनी कृपा करो मैं भटकूँ नहीं जग में चाहे जो करो ॥ मैं प्राण की डोर से तुझसे बंध जाऊँ और ऐसी ग्रन्थि पड़ जाए जो खोल न पाऊँ ॥ हे परम पिता बस इतनी सी इच्छा मेरी सदा सदा रहूँ मैं शरण में तेरी ॥ ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra,
Special Thanks and credits to HTML Codex