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Lyrics

हे परम पिता (He Param Pita)

Satyavani Bhajan (Part-1)
हे परम पिता भय सताए मुझे प्रभु जब विश्वास तुझसे हिले । नाना कल्पना आए मन में हिय चिन्ता अग्नि जले ॥ भय सताए ............................ दु:ख कहीं ना आ जाए बस सोच सोच श्रद्धा टले ॥ भय सताए ............................ नाना इच्छा उठती मन में पूर्ण हेतु मन उछले ॥ भय सताए ............................ इच्छा का मोह ऐसा पड़ा मन ही मन में तड़पे ॥ भय सताए ............................ नश्वर काया नश्वर माया फिर भी जीव इच्छा में उलझे ॥ भय सताए ............................ इच्छा से इच्छा बढ़ती घृत पाई जैसे अग्नि प्रज्वले ॥ भय सताए ............................ ज्ञान भी वहाँ असहाय भया इच्छा प्रभु तुझसे दूर करे । भय सताए ............................ जब जब त्यागा इच्छा मैं घट विश्वास झलके ॥ भय सताए ............................ विगत इच्छा मन शान्त भया तब तब श्रद्धा पान करे ॥ भय सताए ............................ जब जब श्रद्धा मे मैं डूबा सत्य बताउँ आनन्द हिलोर भरे ॥ भय सताए ............................ जब किया समर्पण मैंने तब तब तू मेरा साथ करे ॥ भय सताए ............................ जब जब आया शरण में तेरी तूने सब अवगुण मेरे माफ करे ॥ भय सताए ............................ कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु सब तजि हम प्रभु चरन परे ॥ भय सताए ............................ ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra,
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