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Lyrics

दिखावा (Dikhawa - Show-off)

Satyavani Bhajan (Part-1)
दिखावा हे प्रभु मैं तो दिखावे में उलझ गया । क्या कहेंगे लोग बस इसमें फँस गया ॥ निसि दिवस पर चिन्ता करूँ पराधीन मैं हो गया ॥ हे प्रभु ............................ तूझे मैं भूल गया प्रभु जग में बस उलझ गया ॥ हे प्रभु ............................ भीतर भाव कुटिल का ऊपर मधुर मधुर बोल लिया ॥ हे प्रभु ............................ तूझसे मिलने का दिखावा किया पर माया में मैं भटक गया ॥ हे प्रभु ............................ दया दान परहित का भान किया पर मैं स्वार्थ में ही उलझ रहा ॥ हे प्रभु ............................ पंथ मतों में ऐसा उलझा प्रभु तेरी राह भटक गया ॥ हे प्रभु ............................ जब जब स्वार्थ अटका मेरा तब तब तूझको याद किया ॥ हे प्रभु ............................ अब खुल गयी अँखिया मेरी मैं हूँ दोषी अब समझ में आ गया ॥ हे प्रभु ............................ मेरे अवगुण माफ करो शरण में प्रभु तेरी आ गया ॥ हे प्रभु ............................ ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra,
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