सृष्टि की रचना
सृष्टा ने सृष्टि रची
मूल है इसका आनन्द ।
मेरे तेरे में जीव फंस गया
समझे नहीं मूढ़ मति महा अन्ध ॥
सृष्टा ने ............................
वासना का भ्रम जाल पड़ा
भूल गया जीव ब्रह्मानन्द ॥
सृष्टा ने ............................
पंथ मतों की सुन सुन बातें
बिरथा गल में डाल लिया फंद ॥
सृष्टा ने ............................
सुख के लिए नित्य दौड़ लगाए
दु:ख का भय करे जीव को तंग ॥
सृष्टा ने ............................
मान अपमान का जाल बनाकर
जीव डाल लिया आनन्द में भंग ॥
सृष्टा ने ............................
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु
आनन्द मिलेगा करो हरि का संग ॥
सृष्टा ने ............................
‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।
Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra,