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Lyrics

ओ बन्धु सतगुरु बिनु नैया कौन पार लगावै (O Bandhu Satguru Binu Naiya Kaun Paar Lagavai)

Satyavani Bhajan (Part-1)
ओ बन्धु सतगुरु बिनु नैया कौन पार लगावै ओ बन्धु सतगुरु बिनु नैया कौन पार लगावै । माता पिता जग में सब बस उदर भरन सिखावै ॥ पति पत्नी दोनों जग में उलझे भोग भोगने ध्यावैं । सुत सुता सब स्वार्थ के बस धन दौलत चावैं । मोह का बन्धन ऐसा डालें पल पल जीव तड़पावैं । जग के लोग ताना मारें मान अपमान भय दिखावैं ॥ बन्धु बान्धव बनी बनी के दुख में निकट नहीं आवैं । सतगुरु सच्चा साथी सुख दुख में साथ निभावैं ॥ कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु सतगुरु नैया पार लगावै । ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra,
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