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Lyrics

तू मन के विकार मिटा ले (Tu Man Ke Vikar Mita Le)

Satyavani Bhajan (Part-1)
तू मन के विकार मिटा ले तू मन के विकार मिटा ले तुझे मिल जायेगें करतार । प्राण को शुद्ध कर ले तू मन हो जायेगा परिष्कार ॥ तू मन के विकार मिटा ले ॥ लोभ लालच तू मिटा ले मिट जायेगा तेरा दुराचार । तू मन के विकार मिटा ले ॥ अपना पराया तू भूला ले तुझे एक लगेगा संसार । तू मन के विकार मिटा ले ॥ समर्पण का भाव बना ले बरसेगा आनन्द इकसार । तू मन के विकार मिटा ले ॥ भाव को बस में करले हो जायेगा तू भव पार । तू मन के विकार मिटा ले ॥ आवत जावत श्वास संभारो हो जायेगा तू मन पर असवार । तू मन के विकार मिटा ले ॥ कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु यही सहज साधना अपार । तू मन के विकार मिटा ले ॥ ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
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