प्रभु उवाच
मेरे जैसा मैं ही बना
नहीं कोई दूजा बन पाया ।
मेरे जैसा ............................ ।
जहाँ जहाँ तूने खोजा
वहाँ वहाँ मैं ही समा रहा ।
मेरे जैसा ............................ ।
जो कल्पना आई मन में तेरे
वैसा वैसा रुप बनाता रहा ।
मेरे जैसा ............................ ।
खुद के जाल में तू खुद फँसा
मुझे बिरथा दोष लगाता रहा ।
मेरे जैसा ............................ ।
मन्दिर में तूने खोजा जब
वहाँ मैं मूरत बन बैठा रहा ।
मेरे जैसा ............................ ।
मस्जिद में जब तू गया
बांग तेरी मैं सुनता रहा ।
मेरे जैसा ............................ ।
गुण गोतीत भी तूने बोला
वो भी मैंने मान लिया ।
मेरे जैसा ............................ ।
गृहस्थ विरक्त में तूने बताया
यह भी मैंने स्वीकार किया ।
मेरे जैसा ............................ ।
प्राणों से तूने मुझको जोड़ा
मैं प्राणों से भी जुड़ गया ।
मेरे जैसा ............................ ।
घट-घट में तूने बोला
मैं वो भी नहीं इनकार किया ।
मेरे जैसा ............................ ।
सब बातें मैंने तेरी मानी
फिर तू क्यों भरमा रहा ।
मेरे जैसा ............................ ।
कटुता का तूने बिगुल बजाया
वहाँ से बस में निकल लिया ।
मेरे जैसा ............................ ।
महंत पंथ का तूने आडम्बर बनाया
वहाँ मैं पल भर भी नहीं टिक पाया ।
मेरे जैसा ............................ ।
मन्दिर मस्जिद का फसाद कराए
वहाँ से मैं तुरत भाग लिया ।
मेरे जैसा ............................ ।
जहाँ-जहाँ दुर्गन्ध आए कटुता की
वहाँ वहाँ नहीं जाने का मैंने निश्चय किया ।
मेरे जैसा ............................ ।
प्रेम का अंकुर मिले जिस घट में
उस घट में मैंने सदा बास किया ।
मेरे जैसा ............................ ।
सब भांति तुझको समझाया
तू फिर क्यों बिरथा भटक रहा ।
मेरे जैसा ............................ ।
मुझसे बाहिर कुछ नहीं
अब जाग तूझे जगा दिया ।
मेरे जैसा ............................ ।
कहत प्रभु सुन रे लक्ष्मी
आ मुझसे मिल जा तेरा भ्रम मिटा दिया ॥
मेरे जैसा ............................ ।
‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।
Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra,