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Lyrics

नरक (Narak)

Satyavani Bhajan (Part-1)
नरक जीव तुझे नरक समझाऊँ द्वेष है दरवाजा उसका तुझे सत्य बताऊँ ॥ जीव तुझे नरक ............................ । कपट का कपाट लगा है तुझसे क्या छुपाऊँ ॥ जीव तुझे नरक ............................ । लोभ लालच की जंजीर पड़ी क्रोध का ताला दिखाऊँ ॥ जीव तुझे नरक ............................ । काम की राह है वहाँ मत चल तुझे बचाऊँ ॥ जीव तुझे नरक ............................ । संग्रह का यमराज बैठा है हो सजग तेरी आँख खुलाऊँ ॥ जीव तुझे नरक ............................ । कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु चिन्ता है नरक परम रहस्य बताऊँ ॥ जीव तुझे नरक ............................ ॥ ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra,
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