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Lyrics

अपेक्षा (Apeksha)

Satyavani Bhajan (Part-1)
अपेक्षा जीव तू मत कर अपेक्षा झमेला पड़ जायेगा । अगर पूरी हो गयी इच्छा तेरा दम्भ बढ़ जायेगा । जीव तू मत ............................ नहिं अगर मानी बात तुम्हारी तो द्वेष बढ़ जायेगा । जीव तू मत ............................ जब जब बढ़े द्वेष मन में क्रोध वट फूट जायेगा । जीव तू मत ............................ अगर हुआ क्रोध तन में तो मूढ़ भाव उपजेगा । जीव तू मत ............................ मूढ़ भाव जो आए तुरत ज्ञान मर जायेगा । जीव तू मत ............................ कहत लक्ष्मी सुन रे बन्धु बिनु ज्ञान पशु कहलायेगा ॥ जीव तू मत ............................ ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra,
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