सत्संग कर लो माया जाल कट जाई।
पलपल आनन्द बरसेगा, नित नव मन उमंग उठाई।।
सत्संग कर लो.....
काम, क्रोध के चोर भागेंगे, सदगुण हियँ उमगाई।
राग-द्वेष के विकार मिटेंगे, मोह का जाल कट जाई।।
सत्संग कर लो.....
मन दर्पण होगा निर्मल, कारण दु:ख का मिट जाई।।
सत्संग कर लो.....
सतगुरु चरणों में लगन लगेगी, बिनु हेतु कृपा बरसाई।।
सत्संग है अनमोल कर्म जीवन का, मनोवांछित फल दिलाई।।
सत्संग कर लो.....
सत्संग जानो पारस पत्थर, मूर्ख लोग कंचन बनाई।।
सत्संग से हरि मिलन सम्भव, लक्ष्मीनारायण अनुभव गाई।।
सत्संग कर लो.....
‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।
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