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Lyrics

भजन बिनु जन्म बिरथा खोया यार रे (Bhajan Binu Janam Birtha Khoya Yaar Re)

Satyavani Bhajan (Part-1)
भजन बिनु जन्म बिरथा खोया यार रे भजन बिनु जन्म बिरथा खोया यार रे । माया मोह में तू फँस गया मन में आए बिकार रे । जो जो तू यहाँ खेला सबका फल है तैयार रे । सुत सुता अरु नारी बनी बनी में करें प्यार रे । बनि जो बिगड़ जाए तो सब मारे फटकार रे । बालपन में बोध नहीं यौवन में करता जुझार रे । पश्चाताप करे जरठपन में अब तो सब बेकार रे । गुरु की शरण में जो रहता तो होता तेरा उद्धार रे ॥ ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra,
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