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Lyrics

मन और जीव (Man aur Jeev)

Satyavani Bhajan (Part-1)
मन और जीव हे मन तूझे कैसे मैं समझ पाऊँ ? कहाँ रहता तू कहाँ तेरी ठाउँ लगाऊँ ? कौन है मात पिता तेरे कौन है भगनि भ्राता ? क्यों तू मुझे बिरथा भव सागर में फँसाता ? कौन है तेरे नाती नातिन क्या तू खाता क्या पीता ? कहाँ है सदन तेरो क्यों मोहि भरमाता ? काह तेरो साधन कैसे तू आता-जाता ? हे मन अब तू राह दिखा कैसे भेद बतलाता ? ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra,
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