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Lyrics

ओ मन मेरे तू मत जगत में भरमाय

Satyavani Bhajan (Part -4)
ओ मन मेरे तू मत जगत में भरमाय ओ मन मेरे तू मत जगत में भरमाय। झूठें हैं सब रिश्ते नाते स्वारथ में उलझाय।। बनी बनी में सब साथ निभाते विपदकाल दूर भगाय। सुत सुता सब दु:ख देते मोह में अन्धा बनाय।। कोई न आवे काम जगत में अन्तकाल पछताय। कमलवत रहो जगत में सहजहिं सुख मिलाय।। सब विधि भला होगा सतगुरु चरण लो हेत लगाय। सतगुरु ही सच्चा साथी अन्त समय साथ निभाय।। लक्ष्मीनारायण अनुभव गाता निज घट समझाय।। ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
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