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Lyrics

ओ जरा करो विचार मन में

Satyavani Bhajan (Part -4)
ओ जरा करो विचार मन में ओ जरा करो रे विचार मन में, जाति किसने बनाई इस जग में।। सबका तन बना पाँच बिटामिन का, फिर किसने किया बटवारा मानव का।। फिर किसने भरमाया ग्रन्थन में।। ओ जरा करो बिचार..... सबका मालिक है एक, जरा करो मन में विवेक फिर किसने बाँट दिया पंथन में।। ओ जरा करो बिचार..... कण-कण में वो व्यापक है, सबके घट का वो मालिक है फिर किसने बैठाया मन्दिर मस्जिद में। ओ जरा करो बिचार..... एकरस अखण्ड वो किसी का पूत नहीं जो कभी जन्मा नहीं वो कभी मरा नहीं फिर किसने भरमाया अवतारण में।। ओ जरा करो बिचार..... पत्थर में जो प्राण फूंक सकते हैं, वे क्यों नहीं मरे को जिन्दा करते हैं।। फिर किसने उलझाया पाखण्डन में। ओ जरा करो बिचार..... सबका रक्षक तुम एक बताते हो, रोजा कर जीव मार खाते हो।। यह कैसा धर्म बनाया जग में। ओ जरा करो बिचार..... जितने मत उतने पंथ बना लिए, स्वारथ में सब झगड़ा किए।। अब तो समझो अपने मन में।। ओ जरा करो बिचार..... ऊर्जा ही शक्ति और शक्ति ही ब्रह्म है, ब्रह्म अखण्ड मानव सब एक है।। लक्ष्मीनारायण बता रहा खुल्ले में।। ओ जरा करो बिचार..... ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
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