ओ बन्दे नहिं भरोसा जीवन के रथ का
ओ बन्दे नहीं कुछ भरोसा जीवन के रथ का।
माया के दल दल में कब फँस जाए
काम-क्रोध का कब तूफाँ उठ आए
नहिं भरोसा इसका पल का।।
ओ बन्दे....
प्रेम भावना रखो अपने दिल में
प्रभु कृपा बरसेगी हर पल में
होगा सुखकारी चलना सतपथ का।
ओ बन्दे....
संग्रह तो बिरथा चिन्ता बढ़ायेगा
सब छोड़ तू एक दिन खाली हाथ जायेगा
फिर काहे करता अभिमान माया का।।
ओ बन्दे....
जो भी जन्मा सब वो मरता
फिर क्यों नहिं सतकर्म करता
सबको देना होगा हिसाब कर्मफल का।।
ओ बन्दे....
प्रेम के पथ पर तू चल ले
सतगुरु का ध्यान धरले
लक्ष्मी यही मारग मुक्ति का।।
ओ बन्दे....
‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।
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