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Lyrics

सुनु चेला कहूँ कथा अनमोल रे (Sunu Chela Kahu Katha Anmol Re)

Satyavani Bhajan (Part-1)
सुनु चेला कहूँ कथा अनमोल रे सुनु चेला कहूँ कथा अनमोल रे तू निज घट के पट खोल रे । सुनु चेला ............................ मन से माया पैदा होती तू मन को मन से तोल रे । सुनु चेला ............................ पंथ धर्म का फन्दा अन्धा यह सब जगत का दोष रे । सुनु चेला ............................ ना भोग सत्य ना योग सत्य दृष्टा बनि चल मत कर रोष रे । सुनु चेला ............................ ना नाम ना कोई धाम हरि का घट में मिलेंगे तू निज घट खोज रे । सुनु चेला ............................ सब सुख मिलेगें जग में तू ला हियँ भाव संतोष रे । सुनु चेला ............................ कहत गुरु सुन रे चेला मन बन्धन मन ही मोक्ष रे । सुनु चेला ............................ ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra,
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