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Lyrics

ओ बन्दे सतगुरु सतगुरु बोल (O Bande Satguru Satguru Bol)

Satyavani Bhajan (Part-1)
ओ बन्दे सतगुरु सतगुरु बोल ओ बन्दे सतगुरु सतगुरु बोल तेरा क्या लगेगा मोल । दस बीस कोश नहीं चलना सिर पर भार नहीं रखना । अब तो मन की घुण्डी खोल । ये मन है बहुरंगी घोड़ा घोड़े पर चार लुटेरा अब तो इनकी गर्दन तोड़ ॥ ओ बन्दे........................... बीते बखत लौट नहीं आवै भाई रे फिर चौरासी में डोल । ओ बन्दे सतगुरु.................. कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु अब अन्तर मन से बोल । ओ बन्दे सतगुरु.................. ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
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