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Lyrics

हे प्रभु (Hey Prabhu)

Satyavani Bhajan (Part-1)
हे प्रभु हे घटघट वासी सदा अविनासी हे दयाल सहज कृपाल तू है परम शक्तिशाली तेरी सत्ता बड़ी निराली। तेरे द्वारे कोई न जाए खाली अब मैं आया हूँ तेरे द्वार मुझ पर करो तुम कृपा आपार। तू है करुणा का सागर अब मेरी भर दो घाघर। अब मैं तुमसे करूँ पुकार प्रेम की ब्यार बहा दो करुणा से प्रभु सबको नहला दो पड़ौसी हो सुखी सम्पन्न कोई ना रहे विपन्न सब में मैत्री भाव जगा दो कामादि नागों को मार भगा दो। हे करुणानिधान सुनो मेरी पुकार धन धान्य से भरे पड़ौसी के भण्डार। पर सम्पन्नता देख मैं प्रसन्न हो जाऊँ ऐसी शक्ति दो हमको मानव सेवा कर सुख पाऊँ। नहीं हो कोई दीन दुखी नहीं हो लाचार सहयोग भ्रातत्व से सृष्टि लहलाए ऐसी कृपा करो अपार। इन सत्ताधीशों के मन में सेवा भाव जगा दो मानवता का क्रन्दन है दुखद इनके मन में समझा दो हे करुणाकर ! हे दीनाकर ! अब सबके हृदय में विशुद्ध प्रेम जगा दो। नहीं हो वासना बस प्यार का सिन्धु उमगा दो। हर बच्चा है फुलवारी तेरे उपवन की हम सबको प्रभु महका दो। हिमालय के उतंग शिखर तक मानवता का बिगुल बजा दो। सबके हृदय में सेवा का हो संकल्प तेरे चरणों की शरण ही हो विकल्प। हम बच्चों को सत की राह चला दो। झूठ फरेब मक्कारी का निशा मिटा दो बस प्रेम सोहार्द की अनवरत धार बहा दो। हे प्रभु ! करो कृपा मानवता का क्षितिज अनन्त हो कण कण में सद्गुणों की खुशबू हवाओं में करुणा की सुगंध हो। तेरे चमन का हर फूल महक उठे सौभाग्य किसी का ना रूठे। तेरी करुणा में सब करें स्नान बस इतनी कृपा करो कृपानिधान। गुरु के चरणों में विश्वास अटूट करा दो बस प्रभु शरण में हूँ तेरी मुझे अपना लो। मानव सेवा दल का उतंग हो शिखर हर मानव सेवक हो प्रखर। हम सब मानव सेवक नेकी के राही बनकर सेवा गगन में चमके क्षितिज बनकर। सबको प्रेम की मूर्त बना दो सबके हृदय में करुणा की धार बहा दो। सब मानव सेवक बनकर तेरा प्रतिरुप इस धरा को स्वर्ग बना दें यही इच्छा यही शुभेच्छा हो सबके मन में मानवता का बिगुल बजा दें। ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
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