Loading...

Lyrics

ओ भगति की मैं सरल राह बताउँ (O Bhagati Ki Main Saral Raah Bataun)

Satyavani Bhajan (Part-1)
ओ भगति की मैं सरल राह बताउँ ओ भगति की मैं सरल राह बताउँ । सुन लो बन्धु तुमको मारग सहज समझाउँ ॥ मन हो निर्मल सहजता हो दिल में । जथा लाभ संतोष रखो मिलेंगे प्रभु पल में ॥ राम रहिम के झगड़े छोड़ो नाम जपो मन में । मानवता से प्रेम करो प्रगटैगी भगति या तन में ॥ सतगुरु का विश्वास करो मत भ्रमाओ जग में । मानव सेवा का संकल्प करो मिलेगा आनन्द पल में ॥ ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
Special Thanks and credits to HTML Codex