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Lyrics

ओ माया नटनी करि करि लाड़ सुलावै यार (O Maya Natani Kari Kari Lad Sulavai Yaar)

Satyavani Bhajan (Part-1)
ओ माया नटनी करि करि लाड़ सुलावै यार ओ माया नटनी करि करि लाड़ सुलावै यार। पहले सुलाया मातु गर्भ में लम्बा पाँव पसार ॥ जन्म जब हो लिया तो सुलावे गाके मंगलाचार। बहिन बुआ अब सुलावै करि करि दुलार ॥ बड़ा हुआ तो शादी हुई त्रिया सुलावै करि श्रृंगार। सुत सुता जन्में घर में अब सोवै मोह में लाचार ॥ निस दिवस जूते पड़ते नींद न खुलै तेरी गँवार। जरठपन अब तेरा आ गया फिर भी सोवे पाँव पसार ॥ कहत लक्ष्मी सुन रे मूढ़ मति अब जाग चाल गुरु के त्यार ॥ ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
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