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Lyrics

समय अनमोल (Samay Anamol)

Satyavani Bhajan (Part-1)
समय अनमोल जीव समय है अनमोल अब मन की उलझन खोल । जीव समय ............................ झूठे जग के रिश्ते नाते अब समझ मूढ़ मति महा ढोल । जीव समय ............................ अपना-पराया झूठा फँसाया चहुँ दिस जग में पोलम पोल । जीव समय ............................ जाति धर्म का फसाद भया प्रेम करो कटुता विष ना घोल । जीव समय ............................ स्वार्थ में उलझा जग सारा राग द्वेष छोड़ मधुर मधुर बोल । जीव समय ............................ कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु सुख चाहो तो मन को मन से तोल । जीव समय ............................ ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra,
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