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Lyrics

ओ अब तो जाग जीव मन की मन में रह जाई (O Ab To Jaag Jeev Man Ki Man Mein Reh Jaayi)

Satyavani Bhajan (Part-1)
ओ अब तो जाग जीव मन की मन में रह जाई ओ अब तो जाग जीव मन की मन में रह जाई। सुन्दर महल है या काया को एक दिन ढह जाई ॥ तेरा मेरा बिरथा करता संग तेरे कोई न जाई। हाड़ फोड़ तू धन जोड़े अन्त काल मुट्ठी खाली जाई ॥ भजन करे नहीं तू बिरथा जग में रहा फँसाई। अज्ञान निसा में तू सोता अब तो जाग गुरु जगाई ॥ कहत गुरु सुन रे चेला करि भजन भ्रम निंद खुलाई। ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra, Satyavani Sangit Mahotsav,
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