खुद का राजा
खुद के खुद हो जावो राजा
आवो बजालो आनन्द का बाजा ।
खुद के खुद ............................
पराधीन सुख नहि मिलता
सपने में भी आए लाजा ।
खुद के खुद ............................
क्या कहेंगे लोग बाग
नित्य देवे कष्ट ताजा ।
खुद के खुद ............................
महल खड़ा कर दिखावे का
बिरथा बन्धन तूने साजा ।
खुद के खुद ............................
खुद का जीवन खुद जीले
दुनिया का काह काजा ।
खुद के खुद ............................
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु
हो स्वाधीन मुक्ति पाजा ।
खुद के खुद ............................
खुद के खुद हो जावो राजा
आवो बजालो आनन्द का बाजा ।
खुद के खुद ............................
पराधीन सुख नहि मिलता
सपने में भी आए लाजा ।
खुद के खुद ............................
क्या कहेंगे लोग बाग
नित्य देवे कष्ट ताजा ।
खुद के खुद ............................
महल खड़ा कर दिखावे का
बिरथा बन्धन तूने साजा ।
खुद के खुद ............................
खुद का जीवन खुद जीले
दुनिया का काह काजा ।
खुद के खुद ............................
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु
हो स्वाधीन मुक्ति पाजा ।
खुद के खुद ............................
‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।
Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra,