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Lyrics

काया-माया (Kaya-Maya)

Satyavani Bhajan (Part-1)
काया-माया अरे समझ रे जीव काया की माया को । तोय करे रे क्लेश माया दिन राति को । अरे समझ ............................ नश्वर महल खड़ा ये पड़ गयो भ्रम अमरता को । अरे समझ ............................ बाहिर चमक दमक दिखत भीतर भण्डार मल मूत्र को । अरे समझ ............................ काम क्रोध की लहर उठत चले आदेश मन को । अरे समझ ............................ सात जन्म का संग्रह करता या को नहिं भरोसो पल को । अरे समझ ............................ नाना खेल खेलत मनवा कष्ट मिले जीव तूझको । अरे समझ ............................ कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु हरि भजो नहिं भरोसो तन को । अरे समझ ............................ ‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके। Satyavani Bhajan, Awadhoot Laxminarayan, Awadhoot Devidas Maharaj, Manav Dharma Shastra,
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