सुख
ओ बन्धु तुम को सुख का मरम बताऊँ
चलो गुरु की शरण में सुख का अनुभव कराऊँ ॥
इन्द्रिय सुख तो दुःख का कारण तुम्हें सत्य बताऊँ ।
सच्चा सुख है हरिभजन का भजन की तुम्हें राह समझाऊँ ॥
गुरु का सत्संग आनन्द का रंग चलो तुम पर बरसाऊँ ।
श्रद्धा विश्वास रखो मन में सुखसागर नहलाऊँ ।
कहत लक्ष्मी सुनो रे बन्धु होवो ध्यान मगन परम सुख दिलाऊँ ॥
‘सत्यवाणी भजन’ की रचना गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी ने सतगुरु अवधूत देवीदास महाराज जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आत्मानुभव के आधार पर की है। इसमें आध्यात्मिक गूढ़ रहस्यों को सरल एवं गीतात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि साधारण पाठक भी सहज रूप से आत्मा, जीव और परमात्मा के सत्य को समझ सके।
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