प्रिय पुत्र को संदेश
प्रिय पुत्र,
मेरा प्यार प्राप्त हो ।
हे सुत ! तुम्हारी दुविधा को मैं अच्छी तरह समझता हूँ ।
ऐसा नहीं है कि मैं तेरा ख्याल नहीं रखता हूँ । मैं तो सदा चाहता हूँ
कि तू सुख ही सुख में रहे । इसलिए तो मैं तेरे दुःख के रास्ते में बाधा
डालता हूँ । पर तेरे मन में ऐसा भ्रम है तू दुःख की राह ही चलने का
प्रयास करता है । तेरा यह दोष नहीं क्योंकि तू तो जानता ही नहीं है ।
मैं वो ही तुझे देना चाहता हूँ जो तुझे सुख दे । परन्तु बिडम्बना देख तू
तो मांगता ही उल्टा है ।
मोह में तुझे कभी सुख नहीं मिलेगा इसलिए तो तुझे कष्ट देकर मोह
के रास्ते से हटाता हूँ । तूझे घृणा और प्रतिस्पर्धा का रास्ता घोर कष्ट
देगा । तभी तो उससे बचाने के लिए मैं बाधा उत्पन्न करता हूँ । मान-
अपमान का भय तूझे भयभीत कर देता है । तो फिर तू इस रास्ते पर
चलता ही क्यों है ।
तू देख मोह के रास्ते पर चलने पर तुझे क्या मिलेगा ।
अपना-पराया का पड़ाव मिलेगा जहाँ तू फिर उलझेगा ।
अपना-पराया होगा तो शत्रु-मित्र होगा ही होगा ।
शत्रु मित्र होने पर सुख दुःख पैदा तो होना है ।
शत्रु से घृणा होगी मित्र से मोह होगा तुझे ।
घृणा से छाती जलेगी तेरी मित्र के सुख दुःख से युक्त होगा ।
बिरथा तू दूसरों के कर्मों के अधीन होकर
निज शान्ति गवाँ देगा जरा देख सोच कर ॥
पराधीन जब होगा तू कैसे सुख पायेगा ।
दूसरों के कर्म बन्धन में बिरथा फँस जायेगा ।
इसलिए चाहता हूँ कि तू स्वतंत्र हो ।
भगति, ग्यान ध्यान मेरे रास्ते जरूर हैं ।
मैं तुझे बिना ग्यान भगति के भी अपना लूँगा ।
पर तू निश्चय तो कर मेरे पास आने का ।
मैं तेरी परीक्षा भी नहीं लूँगा पर तैयार तो हो ।
तू बस यह सोचले मैं ही तेरा माता-पिता हूँ ।
तू मेरा पुत्र है और जगत के लोग तेरे भगनि भ्राता हैं ।
जो भोगना चाहता है जीवन में उसको भोग ।
कुछ भी त्याग मत कर कुछ भी नहीं तेरे ऊपर रोक ।
बस तू इतना सा करले तेरी आने जाने वाली श्वास को ।
बैठा हुआ, चलता हुआ सोता हुआ बस निहार ले ।
तू मेरा नाम जप या ना जप बस पिता कहकर बुला ले ।
माँ कहकर बुलाएगा तो भी चला आउँगा ।
तो तू बस मुझे जरुरत पड़ने पर एक बार बुला लेना ।
और शान्त होकर केवल अपनी श्वास को निहार लेना ।
मैं आउँगा तूझसे बात करूँगा और तेरा काम कर दूँगा ।
जब तू मुझे फिरी करेगा मैं वापिस चला आउँगा ।
यह तुझे सरल रास्ता बता दिया ।
जब तू चाहे बुला लेना आ जाउँगा ।
तू स्वतंत्र रहे खुश रहे बस मेरा आशीर्वाद है ।
तेरा पिता
अलख निरंजन ।