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Lyrics

प्रिय पुत्र को संदेश (Priya Putra ko Sandesh)

Satyavani Bhajan (Part-1)
प्रिय पुत्र को संदेश प्रिय पुत्र, मेरा प्यार प्राप्त हो । हे सुत ! तुम्हारी दुविधा को मैं अच्छी तरह समझता हूँ । ऐसा नहीं है कि मैं तेरा ख्याल नहीं रखता हूँ । मैं तो सदा चाहता हूँ कि तू सुख ही सुख में रहे । इसलिए तो मैं तेरे दुःख के रास्ते में बाधा डालता हूँ । पर तेरे मन में ऐसा भ्रम है तू दुःख की राह ही चलने का प्रयास करता है । तेरा यह दोष नहीं क्योंकि तू तो जानता ही नहीं है । मैं वो ही तुझे देना चाहता हूँ जो तुझे सुख दे । परन्तु बिडम्बना देख तू तो मांगता ही उल्टा है । मोह में तुझे कभी सुख नहीं मिलेगा इसलिए तो तुझे कष्ट देकर मोह के रास्ते से हटाता हूँ । तूझे घृणा और प्रतिस्पर्धा का रास्ता घोर कष्ट देगा । तभी तो उससे बचाने के लिए मैं बाधा उत्पन्न करता हूँ । मान- अपमान का भय तूझे भयभीत कर देता है । तो फिर तू इस रास्ते पर चलता ही क्यों है । तू देख मोह के रास्ते पर चलने पर तुझे क्या मिलेगा । अपना-पराया का पड़ाव मिलेगा जहाँ तू फिर उलझेगा । अपना-पराया होगा तो शत्रु-मित्र होगा ही होगा । शत्रु मित्र होने पर सुख दुःख पैदा तो होना है । शत्रु से घृणा होगी मित्र से मोह होगा तुझे । घृणा से छाती जलेगी तेरी मित्र के सुख दुःख से युक्त होगा । बिरथा तू दूसरों के कर्मों के अधीन होकर निज शान्ति गवाँ देगा जरा देख सोच कर ॥ पराधीन जब होगा तू कैसे सुख पायेगा । दूसरों के कर्म बन्धन में बिरथा फँस जायेगा । इसलिए चाहता हूँ कि तू स्वतंत्र हो । भगति, ग्यान ध्यान मेरे रास्ते जरूर हैं । मैं तुझे बिना ग्यान भगति के भी अपना लूँगा । पर तू निश्चय तो कर मेरे पास आने का । मैं तेरी परीक्षा भी नहीं लूँगा पर तैयार तो हो । तू बस यह सोचले मैं ही तेरा माता-पिता हूँ । तू मेरा पुत्र है और जगत के लोग तेरे भगनि भ्राता हैं । जो भोगना चाहता है जीवन में उसको भोग । कुछ भी त्याग मत कर कुछ भी नहीं तेरे ऊपर रोक । बस तू इतना सा करले तेरी आने जाने वाली श्वास को । बैठा हुआ, चलता हुआ सोता हुआ बस निहार ले । तू मेरा नाम जप या ना जप बस पिता कहकर बुला ले । माँ कहकर बुलाएगा तो भी चला आउँगा । तो तू बस मुझे जरुरत पड़ने पर एक बार बुला लेना । और शान्त होकर केवल अपनी श्वास को निहार लेना । मैं आउँगा तूझसे बात करूँगा और तेरा काम कर दूँगा । जब तू मुझे फिरी करेगा मैं वापिस चला आउँगा । यह तुझे सरल रास्ता बता दिया । जब तू चाहे बुला लेना आ जाउँगा । तू स्वतंत्र रहे खुश रहे बस मेरा आशीर्वाद है । तेरा पिता अलख निरंजन ।
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